5BroView

अबकी बार 2026 की होली क्यों है खास और कैसे व किस मूर्त में मनाई जाएगी



साल 2026 की होली कई कारणों से विशेष मानी जा रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी होली का पर्व फाल्गुन पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा, जिसमें ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत मंगलकारी बताई जा रही है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस बार होलिका दहन पर शुभ योग बन रहे हैं, जो सुख-समृद्धि, नई शुरुआत और नकारात्मक ऊर्जा के नाश का प्रतीक माने जाते हैं। खास बात यह है कि मौसम भी संतुलित रहने की संभावना है, जिससे रंगों का उत्सव अधिक आनंदमय रहेगा। सामाजिक रूप से भी 2026 की होली लोगों के बीच भाईचारे, प्रेम और मेल-मिलाप को मजबूत करने वाली मानी जा रही है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में व्यस्त जीवनशैली के कारण त्योहारों की रौनक कम महसूस हो रही थी। इस बार बाजारों में पारंपरिक गुलाल, प्राकृतिक रंग और लोक संगीत के साथ उत्सव की तैयारियां पहले से अधिक उत्साह के साथ देखी जा रही हैं। ग्रामीण राजस्थान से लेकर शहरों तक ढोल, चंग और लोकगीतों के साथ सांस्कृतिक रंगत देखने को मिलेगी। इसलिए 2026 की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि खुशियों, सकारात्मक बदलाव और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली खास होली मानी जा रही है।

2026 की होली: रंग, परंपरा और शुभ संयोगों से भरा रहेगा उत्सव

 इस बार होली धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह रंगों का महापर्व इस वर्ष शुभ ग्रह-नक्षत्रों के संयोग में आ रहा है, जिसे ज्योतिषाचार्य सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत मान रहे हैं। होलिका दहन के समय बनने वाले शुभ योग को बुराई पर अच्छाई की विजय और नई शुरुआत का प्रतीक बताया जा रहा है। इस बार मौसम भी अनुकूल रहने की संभावना है, जिससे खुले वातावरण में रंगोत्सव का आनंद दोगुना होगा।

राजस्थान सहित पूरे भारत में होली की तैयारियां समय से पहले शुरू हो चुकी हैं। गांवों में पारंपरिक चंग, ढोल और लोकगीतों की गूंज सुनाई देने लगी है, वहीं शहरों में प्राकृतिक गुलाल और हर्बल रंगों की मांग बढ़ रही है। विशेष रूप से मरुस्थलीय क्षेत्रों में लोक-फाग, गैर नृत्य और सामूहिक होली मिलन कार्यक्रम उत्सव को सांस्कृतिक पहचान देंगे। इस वर्ष लोगों में डिजिटल व्यस्तता से दूर पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाने का उत्साह भी अधिक देखने को मिल रहा है।

सामाजिक रूप से भी 2026 की होली भाईचारे, प्रेम और आपसी संबंधों को मजबूत करने का संदेश देगी। परिवारों का मिलन, मित्रों के साथ रंगोत्सव और सामुदायिक आयोजन इस पर्व को फिर से पुरानी रौनक लौटाने वाले हैं। कुल मिलाकर, 2026 की होली केवल रंग खेलने का अवसर नहीं बल्कि खुशियों, एकता और नई उम्मीदों का उत्सव बनने जा रही है।


राजस्थान में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों की लोक परंपराओं और संस्कृति का अनोखा संगम है। यहां कई प्रकार की होली मनाई जाती है जिनमें मुख्य तौर पर मैं आपको बता दूं कि कौन-कौन सी होली किन-किन तरीकों से मनाई जाती है इनमें केवल रंगों का प्रयोग ही नहीं होता अन्य कई हरकतों का भी प्रयोग होता है 

1. ब्रज शैली की होली (भरतपुर–डीग क्षेत्र)

राजस्थान के भरतपुर और डीग क्षेत्र में ब्रज संस्कृति से प्रभावित होली मनाई जाती है। यहां होली भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी होती है। मंदिरों में फूलों की होली, गुलाल होली और रसिया गीत गाए जाते हैं। पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते हैं तथा ढोलक और मंजीरे की धुन पर फाग गाया जाता है। इस होली में भक्ति और प्रेम का विशेष महत्व होता है। कई दिनों तक चलने वाले उत्सव में धार्मिक झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

2. गेर या गैर होली (मेवाड़–मारवाड़)

उदयपुर, नाथद्वारा, जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में गैर या गेर होली प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष पारंपरिक पोशाक पहनकर चंग, ढोल और नगाड़ों के साथ गोल घेरा बनाकर नृत्य करते हैं। इसे वीरता और सामूहिक उत्साह का प्रतीक माना जाता है। गांवों और शहरों की गलियों में जुलूस निकाले जाते हैं। रंग और गुलाल उड़ाते हुए लोकगीत गाए जाते हैं। यह होली राजस्थान की लोक संस्कृति और सामूहिक एकता को दर्शाती है।

3. चंग और फाग होली (शेखावाटी व मारवाड़)

शेखावाटी और मारवाड़ क्षेत्र में चंग की थाप पर फाग गाकर होली मनाई जाती है। लोग समूह बनाकर रातभर लोकगीत गाते हैं, जिन्हें ‘फाग’ कहा जाता है। पुरुष चंग बजाते हुए नृत्य करते हैं और हास्य-व्यंग्य गीतों से माहौल को आनंदमय बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा आज भी जीवित है। इस होली में रंगों से ज्यादा संगीत और लोक परंपरा का महत्व होता है।

4. आदिवासी भगोरिया शैली की होली (दक्षिण राजस्थान)

बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ क्षेत्र के आदिवासी समुदायों में भगोरिया जैसी पारंपरिक होली मनाई जाती है। इसमें मेलों का आयोजन होता है जहां युवक-युवतियां पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से उत्सव मनाते हैं। ढोल और मांदल की धुन पर सामूहिक नृत्य किया जाता है। यह होली सामाजिक मेल-मिलाप और पारंपरिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

5. राजघरानों की शाही होली (जयपुर–उदयपुर)

जयपुर और उदयपुर के राजमहलों में शाही अंदाज में होली मनाने की परंपरा रही है। यहां पहले राजपरिवार द्वारा होलिका दहन किया जाता है और बाद में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। हाथी-घोड़े, लोकनृत्य और पारंपरिक संगीत इस होली की पहचान हैं। पर्यटक भी बड़ी संख्या में इसे देखने आते हैं। यह होली राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और राजसी संस्कृति को दर्शाती है।


 राजस्थान की प्रसिद्ध लोक परंपराओं से जुड़ी अलग-अलग होलियों जो अलग-अलग क्षेत्र में प्रसिद्ध है और अलग-अलग तौर तरीकों से मनाई जाती है।


1. मारवाड़ की होली

मारवाड़ क्षेत्र जैसे , पाली, नागौर और बाड़मेर में होली बड़े उत्साह और लोक परंपराओं के साथ मनाई जाती है। यहां चंग की थाप, ढोल और फाग गीत होली की मुख्य पहचान हैं। पुरुष पारंपरिक साफा और धोती पहनकर गैर नृत्य करते हैं तथा गलियों में गुलाल उड़ाया जाता है। होलिका दहन के बाद धुलंडी पर लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हास्य-व्यंग्य गीत और सामूहिक नृत्य विशेष आकर्षण होते हैं। मारवाड़ की होली भाईचारे, लोकसंगीत और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।

2. लट्ठमार होली

लट्ठमार होली मुख्य रूप से उत्तर भारत के ब्रज क्षेत्र से प्रसिद्ध है, लेकिन राजस्थान के कई इलाकों में भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है। इस परंपरा में महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। यह आयोजन भगवान कृष्ण और राधा की लोककथाओं से जुड़ा माना जाता है। हंसी-मजाक और लोकगीतों के बीच यह उत्सव मनाया जाता है। इसमें किसी प्रकार की दुश्मनी नहीं बल्कि प्रेम और हास्य का भाव होता है, जो सामाजिक रिश्तों को मजबूत बनाता है।

3. मेनार की होली

उदयपुर जिले के की होली पूरे राजस्थान में अनोखी मानी जाती है। यहां होली को “गेर” और पारंपरिक युद्ध शैली के रूप में मनाया जाता है। पुरुष पारंपरिक हथियारों और वेशभूषा के साथ जुलूस निकालते हैं। ढोल-नगाड़ों की धुन पर सामूहिक उत्सव आयोजित होता है। गांव के चौक में विशेष आयोजन होते हैं जहां पुरानी वीर परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। यह होली गांव की एकता, साहस और ऐतिहासिक परंपरा का प्रतीक है।

4. देवर-भाभी की होली

राजस्थान के  ब्यावर जिले क्षेत्रों में देवर-भाभी की होली बेहद लोकप्रिय और हास्यपूर्ण परंपरा है। इस दिन रिश्तों में खुलापन और अपनापन देखने को मिलता है। भाभी देवर को रंग लगाती है और मजाकिया रस्मों के साथ हल्की-फुल्की छेड़छाड़ होती है। लोकगीतों और फाग के माध्यम से पारिवारिक रिश्तों की मिठास दिखाई जाती है। यह होली सामाजिक मर्यादा के भीतर हंसी-मजाक और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है तथा परिवारों में आपसी संबंध मजबूत करती है।

5. महावीर जी की होली

करौली जिले में स्थित में मनाई जाने वाली होली धार्मिक आस्था से जुड़ी होती है। यहां भगवान महावीर स्वामी की पूजा-अर्चना के साथ उत्सव मनाया जाता है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में गुलाल अर्पित करते हैं और भक्ति संगीत गूंजता है। धार्मिक शोभायात्राएं और मेले इस होली की विशेष पहचान हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु इस अवसर पर पहुंचते हैं। यह होली आध्यात्मिक शांति और धार्मिक सौहार्द का संदेश देती है।

6. पत्थर मार होली

राजस्थान के बाड़मेर जिले में कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से पत्थर मार होली मनाने की प्राचीन परंपरा रही है। इसमें दो समूह प्रतीकात्मक रूप से एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते थे, जो पुराने समय में वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता था। वर्तमान में सुरक्षा कारणों से इस परंपरा को काफी हद तक नियंत्रित या प्रतीकात्मक रूप में मनाया जाता है। अब इसकी जगह रंग और गुलाल का प्रयोग अधिक किया जाता है। यह होली ऐतिहासिक लोक परंपराओं और सामुदायिक शक्ति प्रदर्शन से जुड़ी मानी जाती है।

7.कोडामार होली – बिनाय, अजमेर

राजस्थान के कस्बे की कोडामार होली एक अनोखी और पारंपरिक लोक परंपरा है, जो हर वर्ष होली पर्व पर उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस होली में पुरुष और महिलाएँ आपस में प्रतीकात्मक रूप से कोड़े (रस्सी या कपड़े से बने) मारते हैं, जो हंसी-मजाक और सामाजिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा भाईचारे, साहस और लोक संस्कृति को दर्शाती है। दूर-दूर से लोग इस अनोखी होली को देखने आते हैं। ढोल-नगाड़ों, लोकगीतों और रंग-गुलाल के साथ पूरा क्षेत्र उत्सवमय हो जाता है।


बाड़मेर में केयर्न वेदांता के तेल कुएं से कच्चे तेल का रिसाव, किसान के खेत में पांच दिन तक फैलता रहा ऑयल विधानसभा में हरीश चौधरी ने उठाया मुद्दा


बाड़मेर | 5Broview 

राजस्थान के जिले में तेल उत्पादन क्षेत्र से जुड़ी एक गंभीर पर्यावरणीय घटना सामने आई है। के ऐश्वर्या वेलपैड-8 क्षेत्र से जुड़े तेल उत्पादन सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण स्थानीय किसान हरजीराम खोथ के खेत में कच्चे तेल का लगातार पांच दिनों तक रिसाव होता रहा। इस घटना से क्षेत्र के किसानों में चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार खेत में अचानक काली परत, तेलीय पदार्थ और तेज गंध दिखाई देने पर ग्रामीणों को रिसाव की जानकारी मिली। इसके बाद किसानों ने कंपनी अधिकारियों एवं प्रशासन को सूचना दी। जांच में सामने आया कि तेल उत्पादन से संबंधित पाइपलाइन या दबाव प्रणाली में आई खराबी के चलते कच्चा तेल जमीन की सतह पर फैलता रहा, जिससे कृषि भूमि प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कंपनी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ऐश्वर्या वेलपैड-8 से जुड़े 20 से अधिक तेल कुओं का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर रिसाव के स्रोत की पहचान, पाइपलाइन निरीक्षण और सुरक्षा मानकों की जांच में जुट गई है। कंपनी द्वारा प्रभावित क्षेत्र में सफाई कार्य तथा मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इधर स्थानीय किसानों ने फसल नुकसान, भूमि की उर्वरता में कमी और भूजल प्रदूषण की आशंका जताते हुए उचित मुआवजे की मांग उठाई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।


राजस्थान विधानसभा में बायतु विधानसभा के विधायक हरीश चौधरी ने विधानसभा में उठाया यह मुद्दा जिससे आम लोगों की आवाज सरकार तक पहुंची और शीघ्र ही इस समस्या का निदान करने के लिए अपील की है।

राजस्थान के जिले में संचालित की तेल उत्पादन परियोजना से जुड़े ऐश्वर्या वेलपैड-8 क्षेत्र में हाल ही में कच्चे तेल के रिसाव की गंभीर घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार यह रिसाव स्थानीय किसान हरजीराम खोथ के कृषि क्षेत्र में लगातार लगभग पांच दिनों तक होता रहा, जिससे आसपास की जमीन, मिट्टी और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खेत में अचानक तेल जैसी काली परत दिखाई देने और तेज गंध फैलने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को दी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तेल उत्पादन से जुड़े पाइपलाइन या भूमिगत दबाव प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण यह रिसाव हुआ, जिसके चलते कच्चा तेल धीरे-धीरे खेत की सतह पर फैलता रहा।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कंपनी प्रशासन ने तुरंत एहतियाती कदम उठाते हुए ऐश्वर्या वेलपैड-8 से जुड़े 20 से अधिक तेल कुओं का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा गया। कंपनी द्वारा रिसाव के स्रोत की पहचान, पाइपलाइन निरीक्षण, दबाव परीक्षण और सुरक्षा मानकों की पुनः जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने भूमि की उर्वरता, फसल नुकसान तथा भूजल प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त की है और उचित मुआवजे की मांग भी उठाई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया तथा पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल का लंबे समय तक खुला रिसाव कृषि भूमि की उत्पादक क्षमता को प्रभावित कर सकता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और फसलों की वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इस घटना ने एक बार फिर तेल उत्पादन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन, पाइपलाइन मॉनिटरिंग और पर्यावरण संरक्षण उपायों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल कंपनी द्वारा रिसाव को नियंत्रित करने, प्रभावित क्षेत्र की सफाई और नुकसान के आकलन की कार्रवाई जारी है, जबकि स्थानीय स्तर पर प्रशासन और ग्रामीण स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

 


यह क्रूड ऑयल पर्यावरण के लिए कितना घातक है जानकर आप भी हैरान रह जाओगे।

कच्चा तेल (Crude Oil) कई प्रकार के हानिकारक रासायनिक तत्वों और हाइड्रोकार्बन यौगिकों का मिश्रण होता है। रिसाव के दौरान मुख्य रूप से बेंजीन (Benzene), टोल्यून (Toluene), एथिलबेंजीन (Ethylbenzene), ज़ाइलीन (Xylene) जैसे विषैले रसायन वातावरण और मिट्टी में फैलते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से BTEX केमिकल कहा जाता है। इसके अलावा कच्चे तेल में पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs), सल्फर यौगिक, भारी धातुएं (जैसे निकेल और वैनाडियम) तथा गैसीय तत्व भी पाए जाते हैं। ये रसायन मिट्टी में मिलकर उसकी प्राकृतिक संरचना को खराब कर देते हैं और पौधों की जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जब कच्चा तेल खेतों में फैलता है तो मिट्टी की ऊपरी सतह पर एक तेलीय परत बन जाती है, जिससे पानी का अवशोषण कम हो जाता है। इससे भूमि की उर्वरता घट सकती है और कई वर्षों तक फसल उत्पादन प्रभावित रह सकता है। सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब यह तेल धीरे-धीरे जमीन के अंदर जाकर भूजल स्रोतों को प्रदूषित कर देता है। यदि यह प्रदूषित पानी पशुओं या मनुष्यों द्वारा उपयोग में लिया जाए तो त्वचा रोग, श्वसन समस्याएं, सिरदर्द, आंखों में जलन तथा लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में वनस्पति और सूक्ष्म जीव (Microorganisms) पहले ही सीमित संख्या में होते हैं। तेल रिसाव इन सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देता है, जो मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा तेल से निकलने वाली गैसें वाष्प बनकर हवा में मिलती हैं, जिससे स्थानीय वायु गुणवत्ता भी प्रभावित होती है और आसपास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।

इस प्रकार बाड़मेर की यह घटना केवल एक खेत तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि यह मिट्टी, जल, वायु, पशुधन और मानव स्वास्थ्य — सभी के लिए बहुस्तरीय पर्यावरणीय जोखिम पैदा करने वाली घटना है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित क्षेत्र की वैज्ञानिक सफाई (Soil Remediation), मिट्टी परीक्षण, भूजल जांच और दीर्घकालीन पर्यावरण निगरानी अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में स्थायी नुकसान को रोका जा सके।


Rashmika Mandanna और Vijay Deverakonda Marriage Latest News और शादी के फोटो किए वायरल

 साउथ फिल्म इंडस्ट्री की सबसे चर्चित जोड़ी मानी जाती है। पिछले कुछ वर्षों से इन दोनों की लव स्टोरी और शादी की खबरें लगातार सोशल मीडिया और मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पूरी कहानी विस्तार से समझे तो कुछ इस प्रकार है कि Vijye Devarcond और Rashmika mandhana  दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय और चर्चित जोड़ी मानी जाती है। इन दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत वर्ष 2018 में आई सुपरहिट तेलुगु फिल्म Geeta Govindam  की शूटिंग के दौरान हुई। इस फिल्म में दोनों ने पहली बार साथ काम किया और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को इतनी पसंद आई कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। शूटिंग के दौरान ही दोनों कलाकारों के बीच गहरी दोस्ती हो गई, जो समय के साथ खास रिश्ते में बदलती दिखाई दी। फिल्म की सफलता के बाद दोनों अक्सर इंटरव्यू, प्रमोशनल इवेंट और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ नजर आने लगे, जिससे उनके रिश्ते की चर्चाएं शुरू हो गईं।


इसके बाद वर्ष 2019 में दोनों ने दूसरी फिल्म Dear Comrade में साथ काम किया, जिसमें उनकी भावनात्मक और रोमांटिक अभिनय शैली को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान उनकी नजदीकियां और स्पष्ट दिखाई देने लगीं। वर्ष 2020 के लॉकडाउन समय में सोशल मीडिया पर दोनों द्वारा साझा की गई तस्वीरों के बैकग्राउंड और लोकेशन समान पाए गए, जिससे फैंस को लगा कि दोनों साथ समय बिता रहे हैं। इसके बाद 2021 में मालदीव वेकेशन की तस्वीरों ने उनके रिश्ते की खबरों को और मजबूत कर दिया, क्योंकि अलग-अलग पोस्ट होने के बावजूद लोकेशन एक जैसी थी।

साल 2022 और 2023 के दौरान रश्मिका मंदाना को कई बार विजय देवरकोंडा के परिवार के करीब देखा गया तथा दोनों को एयरपोर्ट, डिनर और निजी कार्यक्रमों में साथ स्पॉट किया गया। इंटरव्यू में भी दोनों एक-दूसरे की खुलकर तारीफ करते नजर आए, हालांकि उन्होंने अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। वर्ष 2024 में उनकी सगाई और शादी को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं, लेकिन किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। 2025 तक आते-आते दोनों का रिश्ता इंडस्ट्री में एक मजबूत और गंभीर संबंध के रूप में देखा जाने लगा, जहां वे एक-दूसरे के फिल्मी करियर को खुलकर समर्थन देते दिखाई दिए।

अब खबर आ ऐसी आ रही है कि रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की शादी  हुई है, फैंस और मीडिया के अनुसार दोनों लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं और अपने निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखना पसंद करते हैं। समान वेकेशन फोटो, फैमिली कनेक्शन, सोशल मीडिया संकेत और इंटरव्यू के दौरान दिखाई देने वाली सहजता को फैंस उनके रिश्ते का प्रमाण मानते हैं। यही कारण है कि यह जोड़ी आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे पसंदीदा और चर्चित संभावित सेलिब्रिटी कपल्स में गिनी जाती है, और रश्मिका मढ़ाना ने इंस्टाग्राम पर अपनी शादी के कुछ फोटो वायरल किए हैं 

शादी के बाद रश्मिका और विजय ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फोटो शेयर की। रश्मिका ने लिखा कि Hi my loves, introducing to you now 'My Husband', यानी मेरे प्रिय लोगों, आपको अपने पति से मिलवाती हूं।


वहीं विजय देवरकोंडा ने लिखा-

"उसे इस तरह मिस किया कि अगर वह आस-पास होती तो मेरा दिन बेहतर होता। अगर वह मेरे सामने बैठी होती तो मेरा खाना ज्यादा हेल्दी लगता। अगर वह मेरे साथ वर्कआउट करती तो मेरा वर्कआउट ज्यादा मजेदार और कम सजा वाला होता। जैसे मुझे उसकी जरूरत थी- बस घर जैसा और शांति महसूस करने के लिए, चाहे मैं कहीं भी रहूं।"

इससे पहले रश्मिका के माता-पिता ने दूल्हे के परिवार को नारियल, पान के पत्ते, फल, मिठाई और हल्दी-कुमकुम भेंट किए। इसके बाद विजय की मां माधवी देवरकोंडा ने रश्मिका को खानदानी चूड़ियां भेंट कीं।

❤️ लव स्टोरी की शुरुआत कहां से हुई?


रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की दोस्ती की शुरुआत साल 2018 में फिल्म geeta govindam की शूटिंग के दौरान हुई।

इस फिल्म में दोनों की रोमांटिक केमिस्ट्री दर्शकों को इतनी पसंद आई कि फिल्म सुपरहिट बन गई। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे खास रिश्ते में बदलने लगी।

इसके बाद दोनों कई बार साथ में दिखाई देने लगे —

  • वेकेशन ट्रिप
  • डिनर डेट
  • फैमिली फंक्शन
  • सोशल मीडिया हिंट्स

हालांकि दोनों ने लंबे समय तक अपने रिश्ते को “सिर्फ दोस्ती” बताया।

🎬 साथ में की गई फिल्में

1️⃣Geeta Govindam 

  • पहली सुपरहिट फिल्म
  • रोमांटिक कॉमेडी
  • बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर
  • यहीं से फैंस ने इन्हें “लव बर्ड्स” कहना शुरू किया

2️⃣Dear Comrade 

  • इमोशनल और गंभीर प्रेम कहानी
  • दोनों की एक्टिंग की खूब तारीफ हुई
  • फिल्म ने इनके रिश्ते की चर्चाओं को और बढ़ाया

💕 रिलेशनशिप की चर्चाएं कैसे बढ़ीं?

  • दोनों अक्सर एक जैसी लोकेशन से फोटो पोस्ट करते थे
  • मालदीव वेकेशन की समान तस्वीरें
  • इंटरव्यू में एक-दूसरे की तारीफ
  • फैमिली के साथ समय बिताने की खबरें

फैंस ने इन्हें “नेशनल क्रश कपल” कहना शुरू कर दिया।

👨‍❤️‍👨 फैंस क्यों मानते हैं कि शादी तय है?

 लंबे समय से रिलेशन, परिवारों की नजदीकी, सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ दिखन, इंटरव्यू में भावनात्मक जुड़ाव ऐसे कई हरकतों से लगता है कि आपसी मन जुड़ाव है और शादी करना चाहते हैं।


अबकी बार 2026 की होली क्यों है खास और कैसे व किस मूर्त में मनाई जाएगी

साल 2026 की होली कई कारणों से विशेष मानी जा रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी होली का पर्व फाल्गुन पूर्णिमा के शुभ संयोग में मन...

Moste Popular feed